श्वेता रंजन, नई दिल्ली/गाजियाबाद।
ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया की दुनिया में छिपे खतरे एक बार फिर सामने आए हैं। कुख्यात ब्लू व्हेल चैलेंज के बाद अब “Korean Lover Game” को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में गाजियाबाद से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने इस कथित गेम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां तीन सगी बहनों की आत्महत्या ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।
बताया जा रहा है कि यह मामला गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी का है, जहां 12, 14 और 16 साल की तीन बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियां लंबे समय से एक ऑनलाइन “कोरियन लव गेम” की गिरफ्त में थीं।
क्या है Korean Lover Game?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरियन लवर गेम एक ऑनलाइन, टास्क-बेस्ड इंटरैक्टिव गेम बताया जा रहा है। इसमें यूजर एक वर्चुअल पार्टनर चुनता है, जो खुद को कोरियन लड़का या लड़की बताकर बातचीत शुरू करता है। गेम पूरी तरह K-पॉप, K-ड्रामा और कोरियन पॉप कल्चर की लोकप्रियता पर आधारित है।
शुरुआत में यह गेम सामान्य चैट, रोमांटिक मैसेज और हल्के-फुल्के टास्क से आगे बढ़ता है। लेकिन जैसे-जैसे यूजर भावनात्मक रूप से जुड़ता जाता है, वैसे-वैसे टास्क ज्यादा निजी, दबाव भरे और कथित तौर पर जोखिमभरे होते चले जाते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गेम के आखिरी चरणों में यूजर को खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे खतरनाक चैलेंज दिए जाते हैं।
Blue Whale से क्यों हो रही तुलना?
विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स में इस गेम के ढांचे की तुलना ब्लू व्हेल चैलेंज से की जा रही है। ब्लू व्हेल, जो 2016–17 में रूस से शुरू हुआ था, 50 टास्क के जरिए किशोरों को मानसिक रूप से तोड़ने और अंत में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों के चलते कुख्यात हुआ था। भारत सरकार ने बाद में उस पर प्रतिबंध लगाया था।
अब Korean Lover Game को लेकर भी आशंका जताई जा रही है कि इसका मकसद भी कुछ हद तक वैसा ही हो सकता है—धीरे-धीरे भावनात्मक नियंत्रण बनाना और यूजर को खतरनाक फैसलों की ओर धकेलना।
गाजियाबाद केस में क्या सामने आया?
पुलिस के मुताबिक, तीनों बहनें कोरोना काल के दौरान लगातार मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स में डूबी रहने लगी थीं। परिवार ने कई बार उन्हें समझाने और फोन से दूर रखने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उनकी लत इतनी गहरी हो चुकी थी कि वे पढ़ाई और बाहरी दुनिया से कटती चली गईं।
कमरे से मिला सुसाइड नोट जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी बन गया है। फिलहाल पुलिस मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किस प्लेटफॉर्म या लिंक के जरिए इस गेम से जुड़ी थीं। आशंका जताई जा रही है कि यह गेम ऐप स्टोर पर मौजूद नहीं है, बल्कि गुप्त वेबसाइट्स, टेलीग्राम या मैसेजिंग ग्रुप्स के जरिए फैलाया जा रहा है।
बच्चों को कैसे रखें सुरक्षित?
विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर उम्र के बच्चे भावनात्मक जुड़ाव और वर्चुअल रिश्तों में जल्दी फंस जाते हैं। ऐसे में माता-पिता और अभिभावकों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखना, उनके व्यवहार में बदलाव को समय रहते पहचानना और उनसे खुलकर बातचीत करना जरूरी है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि ऑनलाइन एडिक्शन और संदिग्ध गेम्स को हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है। समय रहते जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे खतरों से बच्चों को बचा सकती है।









