महेश गुप्ता, नई दिल्ली
Supreme Court of India ने मुस्लिम महिलाओं के साथ कथित भेदभाव से जुड़े शरीयत उत्तराधिकार कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
यह मामला 1937 के Muslim Personal Law (Shariat) Application Act, 1937 के उन प्रावधानों से जुड़ा है, जो उत्तराधिकार और वसीयत के मामलों में लागू होते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नियम महिलाओं के साथ समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।
मुख्य न्यायाधीश की बेंच की ओर से सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लिया और केंद्र से जवाब मांगा है। यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने कोर्ट में दलील दी कि शरीयत के तहत उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान “आवश्यक धार्मिक प्रथाएं” नहीं हैं, बल्कि यह एक सिविल विषय है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में आधा या उससे भी कम हिस्सा देना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। साथ ही, वसीयत के नियमों का हवाला देते हुए बताया गया कि मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति के केवल एक-तिहाई हिस्से तक ही वसीयत कर सकता है, जो व्यक्तिगत अधिकारों को सीमित करता है।
याचिका लखनऊ की वकीलों पौलोमी पाविनी शुक्ला और आयशा जावेद द्वारा उनके संगठन ‘न्याया नारी फाउंडेशन’ के माध्यम से दाखिल की गई है।
अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।









