महेश गुप्ता, नई दिल्ली
पहली पत्नी की मृत्यु और कोई अन्य दावेदार न होने पर दूसरी पत्नी को पेंशन देने का निर्देश, 3 माह में बकाया भुगतान का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक अहम मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी की पहली पत्नी की मृत्यु उसके जीवनकाल में हो चुकी हो और कोई अन्य दावेदार न हो, तो दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अजय मोहन गोयल ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि पहली पत्नी की कोई संतान नहीं थी और उसका कर्मचारी की मृत्यु से पहले ही निधन हो गया था। याचिकाकर्ता महिला कर्मचारी की दूसरी पत्नी है और उसके अलावा पेंशन का कोई अन्य हकदार मौजूद नहीं है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक साथ रहते हैं, तो विवाह की वैधता की धारणा मानी जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दूसरी पत्नी को पेंशन देने से किसी अन्य पक्ष के हितों को कोई नुकसान नहीं हो रहा है।
कोर्ट ने सरकार के 18 फरवरी 2022 के आदेश को रद्द करते हुए संबंधित विभाग को याचिकाकर्ता महिला को तुरंत पारिवारिक पेंशन जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने पेंशन का बकाया तीन माह के भीतर देने को कहा है। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो सरकार को बकाया राशि पर 6 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने मई 2026 से नियमित मासिक पेंशन देने का भी आदेश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता का विवाह कर्मचारी के साथ 3 अप्रैल 1987 को हुआ था, जब पहली पत्नी जीवित थी। पहली पत्नी की कोई संतान नहीं थी, जबकि दूसरी पत्नी से कर्मचारी की दो संतानें हैं। पहली पत्नी की मृत्यु वर्ष 2015 में हुई, जबकि कर्मचारी का निधन 2021 में हुआ।
सरकार ने दूसरी पत्नी की पेंशन यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि विवाह के समय पहली पत्नी जीवित थी, इसलिए दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जा सकती। हालांकि हाईकोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए इस निर्णय को गलत ठहराया और दूसरी पत्नी को पेंशन देने का आदेश दिया।









