श्वेता रंजन, नई दिल्ली:
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय संस्कृति और परंपराओं में रचे-बसे नजर आए। पीएम मोदी को अपने आवास पर बेहद खास और दुर्लभ पुंगनूर नस्ल की गायों को अपने हाथों से चारा खिलाते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान उन्होंने गायों को स्नेह से सहलाया और उनके साथ कुछ भावुक पल भी बिताए।
यह वीडियो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे भारतीय परंपरा, संस्कार और गौ-सेवा का जीवंत उदाहरण बता रहे हैं। मकर संक्रांति के दिन गौ-सेवा को विशेष पुण्य माना जाता है और पीएम मोदी का यह कदम उसी सांस्कृतिक भावना को दर्शाता है।
दुनिया की सबसे छोटी गाय है पुंगनूर
वीडियो में नजर आ रही पुंगनूर गाय दुनिया की सबसे छोटी कूबड़ वाली देसी गायों की नस्ल मानी जाती है। इसका कद महज ढाई से तीन फीट तक होता है और वजन अधिकतम 200 किलोग्राम तक होता है। यह नस्ल दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से संबंध रखती है।
दूध में भरपूर पोषण
पुंगनूर गाय का दूध बेहद पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। हालांकि यह गाय प्रतिदिन करीब तीन लीटर तक ही दूध देती है, लेकिन इसमें फैट की मात्रा काफी कम होती है।
विलुप्त होने के कगार पर नस्ल
लाइवस्टॉक जर्नल के अनुसार, लगातार क्रॉस-ब्रीडिंग के कारण पुंगनूर गाय की शुद्ध नस्ल विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। अन्य नस्लों के साथ संकरण से इसकी मूल पहचान पर खतरा मंडरा रहा है। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) और एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज ने भी इसे संकटग्रस्त नस्लों की सूची में शामिल किया है।
संरक्षण का संदेश
ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पुंगनूर गायों को अपने आवास में लाकर उनकी सेवा करना, इस दुर्लभ नस्ल के संरक्षण और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का मजबूत संदेश है। आंध्र प्रदेश के गनावरम स्थित एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी साइंसेज के वैज्ञानिक भी इस नस्ल को बचाने के लिए लगातार शोध और संरक्षण कार्य में जुटे हुए हैं।
लाखों में कीमत
पुंगनूर नस्ल की गायों की कीमत भी काफी अधिक होती है। बाजार में इनकी कीमत एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक बताई जाती है।
पीएम मोदी का यह वीडियो न सिर्फ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि भारतीय संस्कृति, पशु-सेवा और विलुप्त होती देसी नस्लों के संरक्षण का भी सशक्त संदेश दे रहा है।









