वॉशिंगटन/नई दिल्ली:
वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना माचाडो द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल सौंपे जाने के बाद वैश्विक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। व्हाइट हाउस में हुई इस मुलाकात के बाद यह सवाल सामने आया कि क्या कोई नोबेल विजेता अपना पुरस्कार किसी अन्य व्यक्ति को दे सकता है। इस पर अब नोबेल संस्थान और नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने नियमों को स्पष्ट किया है।
कैसा होता है नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल
नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल 6.6 सेंटीमीटर व्यास का होता है और इसका वजन करीब 196 ग्राम होता है। यह शुद्ध सोने से निर्मित होता है। मेडल के एक ओर अल्फ्रेड नोबेल की आकृति होती है, जबकि दूसरी ओर तीन व्यक्ति एक-दूसरे के कंधों पर हाथ रखे नजर आते हैं, जो भाईचारे और एकता का प्रतीक माने जाते हैं। बीते 120 वर्षों से इस डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पहले भी बदले हैं मेडल के मालिक
यह कोई पहला मामला नहीं है जब नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल किसी और के पास गया हो। रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोव ने अपने नोबेल मेडल की नीलामी कर 100 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि जुटाई थी, जिसे यूक्रेन युद्ध से प्रभावित शरणार्थियों की मदद में लगाया गया। वहीं, नॉर्वे के पहले नोबेल शांति पुरस्कार विजेता क्रिश्चियन लूस लांगे का मेडल आज भी नोबेल पीस सेंटर में प्रदर्शित है, जो केवल उधार के तौर पर रखा गया है।
नोबेल संस्थान ने क्या कहा
नोबेल संस्थान ने दो टूक कहा है कि एक बार नोबेल पुरस्कार घोषित हो जाने के बाद उसे न तो वापस लिया जा सकता है, न किसी के साथ साझा किया जा सकता है और न ही किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित किया जा सकता है। यह निर्णय स्थायी और अंतिम होता है। हालांकि, संस्थान ने यह भी साफ किया कि मेडल के स्वामित्व में बदलाव हो सकता है, लेकिन पुरस्कार विजेता की पहचान कभी नहीं बदलती।
व्हाइट हाउस में सौंपा गया मेडल
व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान मारिया कोरीना माचाडो ने डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम माचाडो की एक अहम रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उस पृष्ठभूमि में जब ट्रंप ने वेनेजुएला की मौजूदा सत्ता के खिलाफ उन्हें खुला समर्थन नहीं दिया था।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
मेडल मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “उन्होंने मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल दिया, यह मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है।” ट्रंप ने माचाडो की सराहना करते हुए उन्हें “अच्छी महिला” बताया और कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन दौर देखे हैं।
प्रतीकात्मक कदम, लेकिन चर्चा में
नोबेल संस्थान के नियमों के मुताबिक, मारिया कोरीना माचाडो अपने नोबेल शांति पुरस्कार को किसी और को सौंप नहीं सकतीं, इसलिए यह कदम प्रतीकात्मक माना जा रहा है। बावजूद इसके, यह मामला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप इस मेडल को अपने पास रख सकते हैं।









