नई दिल्ली: माघ माह की गुप्त नवरात्रि इस वर्ष सोमवार, 19 जनवरी 2026 से मंगलवार, 27 जनवरी 2026 तक श्रद्धा और साधना के साथ मनाई जाएगी। यह नवरात्रि विशेष रूप से दस महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती है, जिसमें साधक गुप्त साधना, मंत्र-जप और तप के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
19 जनवरी, सोमवार को घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं—
- घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन मुहूर्तों में घटस्थापना करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।
दस महाविद्याएं: शक्ति के दस स्वरूप
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के निम्न दस महाविद्या स्वरूपों की उपासना की जाती है—
- काली: उग्र रूप, काल और अहंकार का विनाश करने वाली महाकाली।
- तारा: करुणा और मोक्ष प्रदान करने वाली, ज्ञान और मंत्रों की देवी।
- त्रिपुरसुंदरी: सौंदर्य, प्रेम और ब्रह्मांडीय संतुलन की अधिष्ठात्री।
- भुवनेश्वरी: सृष्टि को धारण करने वाली महाशक्ति।
- छिन्नमस्ता: त्याग, आत्मबल और चेतना जागरण की प्रतीक देवी।
- भैरवी: तप, साधना और अग्नि तत्व की शक्ति।
- धूमावती: वैराग्य और जीवन के कटु सत्य का प्रतीक स्वरूप।
- बगलामुखी: शत्रु नाश और स्तंभन शक्ति की देवी।
- मातंगी: ज्ञान, संगीत, वाणी और कला की अधिष्ठात्री।
- कमला: समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्रदान करने वाली, महालक्ष्मी का रूप।
मां दुर्गा को प्रसन्न करने के प्रमुख मंत्र
नवरात्रि के दौरान साधक निम्न मंत्रों का जाप विशेष रूप से करते हैं—
- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥ - ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥ - या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ - नवार्ण मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
मान्यता है कि इन मंत्रों के नियमित जाप से साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।
नवरात्रि पूजा की संक्षिप्त विधि
पूजा प्रारंभ करने से पहले आसन पर बैठकर आचमन करें—
ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः। इसके बाद हाथ शुद्ध कर चावल और फूल लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें।
आवाहन मंत्र—
आगच्छ त्वं महादेवि, स्थाने चात्र स्थिरा भव।
यावत् पूजां करिष्यामि, तावत् त्वं सन्निधौ भव॥
इसके पश्चात क्रमशः आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, पंचामृत, वस्त्र, सौभाग्य-सूत्र, पुष्प, नैवेद्य, फल और ताम्बूल अर्पित करें। अंत में मां दुर्गा की आरती कर पूजा संपन्न करें।
क्यों खास है गुप्त नवरात्रि?
गुप्त नवरात्रि में साधना को गुप्त रखने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दौरान की गई उपासना से आध्यात्मिक शक्ति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।)









