कक्षा 8 की एनसीईआरटी की सोशल साइंस पुस्तक में न्यायपालिका को लेकर छपे एक अध्याय ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “बिना शर्त माफी” फिलहाल स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने साफ किया कि यह समझना जरूरी है कि ऐसी सामग्री आखिर प्रकाशित कैसे हुई।
कोर्ट ने न सिर्फ संबंधित अध्याय पर रोक लगाई, बल्कि किताब की प्रिंट और डिजिटल प्रतियों के वितरण पर भी तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। फिजिकल कॉपियों को जब्त करने का आदेश दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि किसी भी रूप में इस सामग्री को साझा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
‘संस्थान की गरिमा से समझौता नहीं’
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि यह महज एक त्रुटि नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कोशिश भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की साख को चोट पहुंचाने वाली किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल (SG) ने अदालत को बताया कि बाजार में आई प्रतियों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि डिजिटल दौर में एक बार सामग्री सार्वजनिक डोमेन में आ जाए तो उसकी हजारों प्रतियां बन जाती हैं, इसलिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
‘न्यायपालिका पर सीधा प्रहार’
सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि इस तरह की सामग्री के परिणाम गंभीर होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक कार्यवाही जारी रहेगी। जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था का पता लगाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने भी लगाई थी रोक
दरअसल, 24 फरवरी 2026 को एनसीईआरटी ने “Exploring Society: India and Beyond, Vol II” नाम से सोशल साइंस की पुस्तक जारी की थी। इसके अध्याय 4 — “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” — में कुछ आपत्तिजनक और तथ्यात्मक त्रुटियां पाई गईं।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस पर आपत्ति जताते हुए किताब के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। एनसीईआरटी ने आदेश का पालन करते हुए बिक्री रोक दी और बयान जारी कर कहा कि न्यायपालिका का वह सम्मान करता है तथा यह त्रुटि अनजाने में हुई है। संस्था ने इसके लिए खेद भी व्यक्त किया है।
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह महज संपादकीय चूक थी या कुछ और।









