पटना।
राहुल गांधी और तेजस्वी की संयुक्त रैली: “बदलाव” का संदेश या चुनावी शक्ति प्रदर्शन?
बिहार चुनाव में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मुजफ्फरपुर के सकरा विधानसभा क्षेत्र में आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव एक साथ मंच साझा करने जा रहे हैं। यह रैली महागठबंधन के चुनाव अभियान की सबसे बड़ी और निर्णायक सभा मानी जा रही है। महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि इस जनसभा से बिहार में “बदलाव का संदेश” जाएगा। कांग्रेस और राजद कार्यकर्ता पिछले तीन दिनों से इस रैली की तैयारियों में जुटे थे। बीजेपी की ओर से इस रैली पर पहले ही हमला बोला गया है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट किया — “कोलंबिया की छुट्टियों और वीडियो ब्लॉग्स के बीच राहुल को आखिरकार बिहार की याद आ ही गई।” अब देखना दिलचस्प होगा कि राहुल-तेजस्वी की यह जोड़ी बिहार के सियासी माहौल में क्या नया मोड़ लाती है।
घोषणापत्र में रोजगार का बड़ा दांव
बिहार में चुनावी शोर अब अपने चरम पर है। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, सियासी दलों के बीच वादों, वारों और जवाबी वारों की रफ्तार तेज़ हो गई है। महागठबंधन ने आज अपना घोषणापत्र जारी कर दिया — जिसमें युवाओं को रोजगार और सरकारी नौकरियों का बड़ा वादा किया गया है।
राजद, कांग्रेस और वीआईपी के साझा मंच से जारी इस दस्तावेज़ में शिक्षा, स्वास्थ्य और किसान कल्याण को भी प्राथमिकता दी गई है।
घोषणापत्र जारी होते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पलटवार किया। उन्होंने कहा — “वर्ष 2005 से पहले बिहार में अशिक्षा, बेरोजगारी और पलायन नियति बन चुकी थी। उस दौर में सरकारी कर्मियों को महीनों वेतन नहीं मिलता था और नौकरी के लिए सौदेबाज़ी आम थी।”
नीतीश कुमार ने महागठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि “आज वही लोग सत्ता के लोभ में हवा-हवाई वादे कर रहे हैं।” अब सवाल यह है — बिहार की जनता के लिए ज्यादा भरोसेमंद क्या होगा — तेजस्वी यादव का नया वादा या नीतीश कुमार का 20 साल का कामकाज?
मनेर में बवाल: जनसुराज की प्रचार गाड़ी पर हमला,
बिहार चुनावी माहौल इस बार पहले से ज्यादा गर्म दिख रहा है। मंगलवार रात मनेर विधानसभा क्षेत्र में जनसुराज पार्टी की प्रचार गाड़ी पर हमला कर दिया गया। घटना ब्रह्मचारी गांव की है, जहां असामाजिक तत्वों ने पार्टी के प्रचार वाहन को रोककर बैनर-होर्डिंग फाड़ दिए और ड्राइवर के साथ मारपीट की। जनसुराज पार्टी प्रत्याशी गोपाल उर्फ संदीप सिंह ने इसे “चुनावी माहौल बिगाड़ने की साज़िश” बताया है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सवाल यह है — क्या बिहार का चुनाव एक बार फिर हिंसा के साये में जा रहा है?
ओवैसी का सियासी हमला: मोदी, नीतीश और लालू — तीनों पर निशाना
बिहार के मुंगेर में आज एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एनडीए और महागठबंधन — दोनों पर तीखा हमला बोला।
ओवैसी ने जनसभा में कहा — “मोदी का दिल अहमदाबाद में बसता है, नीतीश का दिल राजगीर में, और लालू का दिल उनके बेटे में। अब बताइए, बिहार की जनता का दिल कहां बसेगा?” ओवैसी ने तीनों दलों पर मुसलमानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नीतीश शासन को “दूसरा जंगलराज” बताया। उन्होंने बीजेपी पर भी नफरत फैलाने का आरोप लगाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह आक्रामक तेवर महागठबंधन के अल्पसंख्यक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
दो वोटर कार्ड विवाद में फंसे प्रशांत किशोर
बिहार चुनाव के बीच आज एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) को दो वोटर आईडी कार्ड रखने के मामले में चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है। आरोप है कि एक वोटर कार्ड बिहार के रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र में और दूसरा पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में दर्ज है। दिलचस्प बात यह है कि भवानीपुर का पता टीएमसी मुख्यालय — 121, कालीघाट रोड बताया गया है। बिहार चुनाव आयोग ने किशोर को तीन दिनों में जवाब देने को कहा है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत यह अपराध माना जाता है — जिसमें एक साल की सज़ा या जुर्माने का प्रावधान है। प्रशांत किशोर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा — “मैं 2019 से करगहर का मतदाता हूं। दो साल कोलकाता में रहने के दौरान वहां भी नाम दर्ज हो गया। मुझे डराने की कोशिश न की जाए — न चुनाव आयोग से, न भाजपा से।” इस मामले ने बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। बीजेपी और जेडीयू ने PK पर हमला बोला, जबकि आरजेडी ने कहा — “यह साबित करता है कि बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण सिर्फ दिखावा था।”









