लोक जनशक्ति पार्टी में दो गुटों में बंट जाने के बाद से राज्य में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। चाचा पशुपति पारस (Pashupati Paras) और भतीजे चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बीच की लड़ाई पार्टी और परिवार से बड़ी होकर राज्य की सत्ता तक पहुंच गई है। एक ओर जहां एलजेपी का दोनों ही खेमा पार्टी पर अपनी दावेदारी और नेतृत्व की लड़ाई लड़ रहा है वहीं इन सबके बीच बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने एलजेपी संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान की जयंती मनाने का फैसला सुना कर बड़ा संदेश दिया है। 5 जुलाई को चिराग पासवान के पिता और दिवंगत नेता रामविलास पासवान का जन्मदिन है। चिराग को साथ लाने के लिए राजद भी रामविलास पासवान की जयंती मनाने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से एक बयान में कहा गया कि दलित और पिछड़ों के दिवंगत नेता रामविलास पासवान की जयंती पार्टी मनाएगी।
वैसे तो यह दिन आरजेडी के लिए भी खास है। 5 जुलाई को ही आरजेडी का स्थापना दिवस है। इस साल राष्ट्रीय जनता दल 25वां स्थापना दिवस मनाएगा। राजद ने फैसला किया है कि स्थापना दिवस के कार्यक्रम से पहले रामविलास पासवान की जयंती का कार्यक्रम मनाया जाएगा।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ‘भाषा’ को दिए गए इंटरव्यू में उस दौर को याद किया जब एलजेपी के पास एक भी विधायक नहीं था और रामविलास पासवान 2009 में चुनाव हार गए थे। तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने ही उन्हें आरजेडी के कोटे से राज्यसभा भेजा था। तेजस्वी ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा रामविलास पासवान के साथ खड़ी है। तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘हमारी पार्टी ने दलित मसीहा राम विलास जी के बिहार को दिए योगदान को देखते हुए उनकी जयंती मनाने का फैसला किया है, मुझे लगता है कि यह अपने आप में सब बयां करने वाला है।
चिराग पासवान भी इसी दिन हाजीपुर से ‘आशीर्वाद यात्रा’ शुरू करेंगे। उन्होंने हाजीपुर से ‘आशीर्वाद यात्रा’ का फैसला इसलिए किया क्योंकि इस संसदीय सीट का नेतृत्व पहले उनके पिता ने किया और अब चाचा पशुपति कुमार पारस कर रहे हैं। चिराग पासवान के लिए यह यात्रा बहुत अहमियत रखती है क्योंकि इसे उनके शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
एलजेपी में मचे घमासान का फायदा बिहार के सभी दल उठाने में लगे हैं। एक ओर जहां सत्तारूढ़ जेडीयू सांसद पशुपति पारस के साथ दिख रही है वहीं आरजेडी चिराग पासवान का साथ पाने की कोशिशों में जुटे हैं। यही वजह है कि दो दिन पहले पटना लौटे तेजस्वी ने चिराग को ‘भाई’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चिराग भाई को तय करना है कि वे आगे किसके साथ रहना चाहते हैं। यही नहीं तेजस्वी ने इस दौरान आरजेडी की ओर से एलजेपी पर किए गए उपकार की भी याद दिलाई।सूत्रों की मानें तो लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल रामविलास पासवान की जयंती मनाकर चिराग को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, हर दल इस कवायद में इसलिए जुटी है ताकि एलजेपी का वोट बैंक बटोर सके। सबकी नजर दलित और पिछड़े वोटबैंक पर है। एलजेपी का वोट शेयर बिहार में लगभग 6 फीसदी है। अगर एलजेपी के वोट शेयर को 17 फीसदी अल्पसंख्यक वोटों और 16 फीसदी यादव वोट बैंक के साथ आ जाये तो यह लगभग 39 फीसदी हो जाता है। ऐसी स्थिति में आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में फायदा मिलेगा।









